रविवार, 18 मार्च 2012

सूखी होली - ज़रूरत या झूठा अपराधबोध

होली पर मुझे अधिकतर वो ही लोग बिना पानी के होली खेलने की सलाह देंगे.

- जो शेविंग करने में एक बाल्टी पानी 'वेस्ट कर' देते है...
- रोज फव्वारे के नीचे , 'बाथ टब' में स्नान करते वक़्त 20 बाल्टी पानी 'बर्बाद' कर देते है...
- महीने में एक बार स्विमिंग पुल में जरुर स्नान करने जायेंगे ...
- रोज अपनी कार धोते वक्त १० बाल्टी पानी 'ढोल' देंगे...
- मंजन करते वक़्त (क्षमा करें, अंग्रेजीदां इसे ब्रश करते समय पढ़ें ) दो बाल्टी पानी पर "पानी फेर देंगे" ...

मै तो होली पानी वाली ही खेलूँगा... वैसे भी मेरी होली का "सारा गणित " ८ बाल्टी पानी प्रति व्यक्ति में हो जाता है और मेरे परिवार का हर 'व्यक्ति' कम से कम ३६५ बाल्टी प्रति वर्ष (प्रति दिन के गणित से ) बचाता है ...
मेरा तो अधिकार बनता है वर्ष भर इतनी चिंता करने के बाद अपना पर्व "अपने ढंग" से और जरा " ढंग - धांग" मनाने का
सोचना उन्हें है जो वर्ष भर नहीं सोचते...
-संदीप भालेराव

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