बुधवार, 18 अप्रैल 2012

ये कैसी भाषा है ? लगता है लज्जित है अपने ही शब्द-भंडार पर

सुबह समाचार - पत्र के एक समाचार पर दृष्टी ठहर गयी .....सोनाक्षी सिन्हा ने फिल्म दबंग से " डैब्यु " किया है
मुझे चिढ है ऐसी भाषा शैली से ..लम्बे समय से लगातार यह " डैब्यु " पढ़ रहा हूँ ...क्यूँ आवश्यक लगता है यह शब्द प्रयोग ?? क्या यह पंक्ति इस तरह से लिखी जाती "...सोनाक्षी सिन्हा ने फिल्म दबंग से फिल्मों में प्रवेश किया " या "...सोनाक्षी सिन्हा ने दबंग से अपने व्यावसायिक जीवन में कदम रखा " तो क्या पाठक समझ नहीं पाते? ...क्या यह बहुत जटिल हिंदी है ...क्या ऐसी वाक्य-रचना लज्जाजनक है ? ...या सोनाक्षी सिन्हा का गौरव (?) कम हो जाता ?
भाषाई दृष्टी से दरिद्र ...सीखने-जानने और मानने में अपनी हेठी समझने वाले और प्रथम श्रेणी के हेकड़ीबाज "संवाददाता" (जो स्वयं को पत्रकार समझते हैं ) समाचार पत्रों में थोक बंद रूप से आ गए हैं और जाने अनजाने पाठकों की भाषा को "दोष-पूर्ण" बना रहे हैं
मुझे बहुत आपत्ति है ...आज के युग में भी व्यवस्था होती, तो इस विषय पर मै "कोप-भवन" में होता

-संदीप भालेराव
(और भी आपत्तियां है समाचार पत्रों की भाषा पर ...आपलोग चाहेंगे तो विस्तृत पोस्ट फिर कभी )

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